किरण की सुधि
भूली बिसरी सुधियों के संग एक कहानी हो जाये,तुम आ जाओ पास में जो तो रुत रूमानी हो जाये।मन अकुलाने लगता है चंदा की तरुनाई से ,रजनीगंधा बन जाओ तो रात सुहानी हो जाये।रेशम होती हुई हवाए तन से लिपटी जाती है,पुरवाई में बस जाओ तो प्रीत सयानी हो जाये।मन बधने सा...
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DR. PAWAN K MISHRA
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[31 May 2010 00:38 AM]



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