कुछ बहके बहके से अल्फाज़....जाने किसके लिए

kuch ehsaas वो खामोश नज्में कहता था मेरे लिएमैं बदन के रोम रोम से सुना करती थीवो अपनी आँखों से सहलाता था मुझेमैं घूँट घूँट उसके इश्क को पिया करती थीवो कुछ अधूरी सी इबारत लिख गया था मेरी धडकनों परमैंने उन्हें अपना नाम पता बनाकर पूरा किया थावो किसी लैला की बात किया... [पूरी पोस्ट]
writer pallavi trivedi

नज़्म

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[01 Jun 2010 04:23 AM]

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