माहिये - 3
31. देखी है इबादत जब देखना है हमको उसका तो करिश्मा अब .32. मिलती है खुशी ऐसे मिलकर अपनों से मिसरी हो घुली जैसे .33. दिलबर हैं मेरे आते जा के ले आऊँ मैं धुन गीत मधुर गाते .34. विस्मित कर दूँ उनको हो के खुशी पागल लिपटा लेंगे वह मुझको .35. चाहो जो मिलें...
[पूरी पोस्ट]
Kavi Kulwant
माहिये - 3
11
1
0
1
4
[01 Jun 2010 04:26 AM]



Shuffle








