ब्राह्मण बालक की मृत्यु - उत्तरकाण्ड (17)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण एक दिन श्रीराम अपने दरबार में बैठे थे तभी एक बूढ़ा ब्राह्मण अपने मरे हुये पुत्र का शव लेकर राजद्वार पर आया और 'हा पुत्र!' 'हा पुत्र!' कहकर विलाप करते हुये कहने लगा, "मैंने पूर्वजन्म में कौन से पाप किये थे जिससे मुझे अपनी आँखों से अपने इकलौते पुत्र की... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया

राम

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[01 Jun 2010 04:33 AM]

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