अक्सर भगोड़े क्यों होते हैं सन्यासी...?
पहले सन्यासी होने की परिभाषा को समझें...भगवा वस्त्र धारण किए माथे पर चंदन का लेप लगाए कमंडल और चिमटा थामे, मुख से प्रभु नाम की महिमा का गान करता और प्रवचन अथवा कथा बांचता हर कोई साधु या सन्यासी हो, यह आवश्यक नहीं है। पर उपदेश कुशल बहुतेरे। अर्थात दूसरों...
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अनुराग मुस्कान
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[01 Jun 2010 02:29 AM]



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