अभियान [कविता] - श्रीप्रकाश शुक्ल
नहीं चाहता मेरी कृतियाँ, मधुशालाओं में गायी जाएँ नाचें कूदें शब्द नटी बन सम्पन्नों का जी बहलायें मुझे नहीं चिंता उनकी, जो रह्ते हैं प्रागारों में मेरी कृतियाँ उनको अर्पित, जो पलते हैं गलियारों में अतिरिक्त......
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[01 Jun 2010 03:30 AM]



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