उदघोषणा !

स्वार्थ माहौल को और ज्यादा सड़ते हुये नहीं देख सके वे लोग और खड़े होकर उन्होने हुंकार भर ही दी सच के तेज से भरे, कई चेहरे एक साथ चमक उठे जोश से भरी आवाजों ने एक साथ कर दी उदघोषणा। अब धर्म के नाम पर भी हमारे रक्त में उबाल नहीं आता हमारे सम्प्रदाय के [...]... [पूरी पोस्ट]
writer Swaarth

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[01 Jun 2010 02:45 AM]

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