नजर राजेश की नजर में
हाँ, मित्रवर राजेश उत्साही अपने बारे में कहते हैं--जीवन की सार्थकता की तलाश जारी है। 26 साल तक एकलव्य संस्था में होशंगाबाद, भोपाल में काम। बाल विज्ञान पत्रिका चकमक का सत्रह साल तक संपादन। स्रोत,संदर्भ,गुल्लक,पलाश,प्रारम्भ के संपादन से जुड़ा रहा।...
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डा.सुभाष राय
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[01 Jun 2010 02:47 AM]



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