अमी चरणसिंह का मुक्तिबोध की कविताओं में व्यक्त हुए भाषा के परे के बिम्बों व छवियों के चित्रांकन के लिये प्रेरित होना उत्साह भी जगाता है और आश्वस्त भी

MUKESH MISHRA अमी चरणसिंह तीन सीरीज़ में मुक्तिबोध की कविता 'मुझे कदम कदम पर चौराहे मिले हैं' को लेकर जो चित्र-रचना कर रहे हैं, उसके कुछेक चित्र अभी हाल ही में देखने को मिले तो मुझे बरबस ही कला-रूपों के अंतर्संबंधों पर महादेवी वर्मा की 'दीपशिखा' की भूमिका याद आ गई... [पूरी पोस्ट]
writer MUKESH MISHRA
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[01 Jun 2010 01:51 AM]

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