क्यों पुलकित है ज़लज़ला???
पूरे मधुमक्खियों के छत्ते मेंएक रानी होती है लेकिन जब सभी रानी बनकर टूट पड़ें किसी एक पर तो ज़लज़ला आता है!कोई शक्ल नहीं होती उसकीनाम नहीं, जाति नहीं, लिंग भेद नहीं.रक्तबीज की तरह हर पल एक नया रूप धरकर आता है वो सामने.जानते हो क्यों...क्योंकि एक बार अपमानित...
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सम्वेदना के स्वर
ज़लज़ला
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[01 Jun 2010 01:31 AM]



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