गीतों भरी शाम..डॉ श्याम गुप्त के दो गीत ...
(१) मेरे गीत सुरीले क्यों हैं...मेरे गीतों में आकर के तुम क्या बसे,गीत का स्वर मधुर माधुरी होगया। अक्षर अक्षर सरस आम्रमंजरि हुआ,शब्द मधु की भरी गागरी होगया। तुम जो ख्यालों में आकर समाने लगे,गीत मेरे कमल दल से खिलने लगे। मन के भावों में तुमने जो नर्तन...
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Dr. shyam gupta
प्रणम्य शहीद
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[01 Jun 2010 01:20 AM]



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