“शायद वर्षा जल्दी आये” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
टर्र-टर्र मेंढक टर्राए! शायद वर्षा जल्दी आये! बाजारों में आम आ गये, अमलतास पर फूल छा गये, लेकिन बारिस नजर न आये! टर्र-टर्र मेंढक टर्राए! शायद वर्षा जल्दी आये! सूख गये सब ताल-तलैय्या, छोटू कहाँ चलाए नैय्या! सबको गर्मी बहुत सताए! टर्र-टर्र मेंढक टर्राए!...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[31 May 2010 22:26 PM]



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