छाता

निशांत का हिंदीज़ेन ब्लॉग ज़ेन गुरु के कक्ष में प्रवेश करने से पहले शिष्य ने अपना छाता और जूते बाहर छोड़ दिए. “मैंने खिड़की से तुम्हें आते हुए देख लिया था” – गुरु ने पूछा – “तुमने अपने जूते छाते के दाईं ओर उतारे या बाईं ओर?” “यह तो मुझे याद... [पूरी पोस्ट]
writer Nishant

ज़ेन कथाएँजागरण

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[31 May 2010 21:30 PM]

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