छाता
ज़ेन गुरु के कक्ष में प्रवेश करने से पहले शिष्य ने अपना छाता और जूते बाहर छोड़ दिए. “मैंने खिड़की से तुम्हें आते हुए देख लिया था” – गुरु ने पूछा – “तुमने अपने जूते छाते के दाईं ओर उतारे या बाईं ओर?” “यह तो मुझे याद...
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Nishant
ज़ेन कथाएँजागरण
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[31 May 2010 21:30 PM]



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