ध्यान- प्रकाश
केवल सुन-पढ़ लिया है किभीतर है स्वच्छ नीला असीम आकाशपर जब देखा भीतर दिखाघना कुहरा,इतना गहरा और सख्त किकुहरा ही कुहरे को देखे बस कुहरा ही कुहराभीतर के आकाश को छुपा देता कुहराबाहर के प्रकाश को ग्रस लेता कुहरामनुष्य के सारे विचार कुहरे जैसे ही हैंकुहरे जैसा...
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Arun Khadilkar
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[31 May 2010 20:49 PM]



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