[नामपुराण-13] श्रोता से श्रोत्रिय तक…

शब्‍दों का सफ़र ... श्रोता से नजदीकी रिश्ता है श्रोत्रिय का। प्राचीनकाल में ज्ञानार्जन का जरिया श्रौतकर्म अर्थात श्रवण, मनन और चिन्तन ही था ... ब्राह्मणों के चिर-परिचित उपनामों या सरनेम में श्रोत्रिय का शुमार भी है। विद्याव्यसन और अध्यापन से ही जुड़ा हुआ शब्द है... [पूरी पोस्ट]
writer अजित वडनेरकर

नामपुराण

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[31 May 2010 16:51 PM]

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