बहुत सताया गर्मी ने......
(चित्र गुगुल से साभार) रिम-झिम रिम-झिम बरसा बादल, बहुत सताया सूरज ने... सब के तन मन आग लगी है, बहुत सताया गर्मी ने.... ऊपर वाले अब तो सुन ले, तू अब तक क्यों सोया है। महँगाई की मारे खा के, निर्धन अक्सर रोया है। तू भी क्यों उस को है रूलाता, पेश आ उस से...
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परमजीत सिँह बाली
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[31 May 2010 08:19 AM]



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