आज शाम गली में बच्चे खेल रहे थे....

मेरी दुनिया मेरा जहां.... आज शाम गली में बच्चे खेल रहे थे.... एक छोटी सी गेंद... और बारह बच्चे... गेंद एक एक हाथों से होती हुई... किसी एक के हाथ में जा रूकतीफिर वह उसे उछाल देता... फिर सारे बच्चे उसे लपकने को दौड़ते..... कोई एक गेंद को झपट लेताऔर बाकी फिर से नीचे बैठ जाते.... फिर... [पूरी पोस्ट]
writer देव कुमार झा
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[31 May 2010 14:02 PM]

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