गनीमत है की दिन के बाद रात होती है

Kuchh kahi kuchh unkahi गनीमत है की दिन के बाद रात होती है, उनसे कुछ पल ही सही मेरी बात होती है।ख्वाब में ही दिखते हैं आजकल वो अक्सर ,उनसे यूँ ही हर दिन मेरी मुलाकात होती है।भींगी जुल्फों को जब भी जोर से झटकती हैं मेरे घर बिन बादल ही फिर बरसात होती है।उनसे मिलता हूँ तो बातें... [पूरी पोस्ट]
writer VIJUY RONJAN
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[31 May 2010 14:01 PM]

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