varsha
यादों की बस्ती में रहना, भटकना, फिरना..कितना अच्छा लगता है। बीती बातों को बुहारने का अपना ही मज़ा है।बार-बार वही बात, वही घटना, वही मंजर,कभी ये नहीं लगता कितनी बार इसे याद कर चुके, इस पर कितनी बातें बनाई, कितनी हंसी उड़ाई, कितना चहके, कितना उदास ही...
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वर्षा
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[31 May 2010 13:55 PM]



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