varsha

varsha यादों की बस्ती में रहना, भटकना, फिरना..कितना अच्छा लगता है। बीती बातों को बुहारने का अपना ही मज़ा है।बार-बार वही बात, वही घटना, वही मंजर,कभी ये नहीं लगता कितनी बार इसे याद कर चुके, इस पर कितनी बातें बनाई, कितनी हंसी उड़ाई, कितना चहके, कितना उदास ही... [पूरी पोस्ट]
writer वर्षा
views
19
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
8
[31 May 2010 13:55 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix