सुनो अनु
__________________________________सुनो अनु! ऐसा क्यों होता है तुम अपने लिए चुनती हो दिनऔर रात मेरे हिस्से आती है .एक अलसाई सुबहतुमने चुना था प्रेममैं बेचैन हो उठा.एक खड़ी दोपहरतुमने चुना यथार्थमैं दिग्भ्रांत हो उठा.फिर, आज इस ऊदी शामतुमने चुना है...
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prkant
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[31 May 2010 13:42 PM]



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