क्योंकि यहाँ तो सब अपना हाथ है , जगन्नाथ
पहले हम विचलित हुए, निकाले अपने मन के गुबार, मित्रों ने भी दिया साथ पर अब धीरे धीरे समझ रहे हैं, माया नगरी की माया को रक्त बीज सब बन रहे यहाँ (बेनामी छ्द्म्नामी ब्लोगरों की उत्पत्ति)क्योंकि यहाँ तो सब अपना हाथ है...
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सूर्यकान्त गुप्ता
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[31 May 2010 13:39 PM]



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