चला हूँ मैं, चले हो तुम धीरे धीरे ....!
======================बहर: हजाज़ सालिम ( १२२२ १२२२ १२२२)======================चला हूँ मैं, चले हो तुम धीरे धीरे ..नज़र भी होगी, यूँ ही नम धीरे धीरे...दीवाने गर है तन्हाई के दोनों हम,होगा महसूस दर्द-ओ-ग़म धीरे धीरे...ठहर के जाम होंटों से लगाना तुम...
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Kunaal
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[31 May 2010 10:16 AM]



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