आलूबड़ा
अजित वडनेरकर जी के 'शब्दों के सफ़र' पर आज ३१-०५-१० को ये नाश्ता मिला :-आलूबड़ा छोटा नही पसंद, 'बड़ा' खा रहे है हम,खाके, पचाके 'छोटा' ही बतला रहे है हम.घर है, न है दुकान, सड़क किसके बाप की!'वट' वृक्ष बनके फैलते, बस जा रहे है...
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Mansoor Ali
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[31 May 2010 09:39 AM]



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