संजय व्यास की कविता - दूसरी किस्त

अनुनाद घर गृहस्थी में धंसता पुराना प्रेम पत्र (एक काव्यकथा) " श्री गोपीवल्लभ विजयते"बम्बोई(तिथि अस्पष्ट)प्यारी सुगना,मधुर याद.श्री कृष्ण कृपा से मैं यहाँ ठीक हूँ और तुम भी घर पर प्रभु कृपा से सानंद होंगी.मेरा मन तो बहुत कर रहा है कि पत्र के स्थान पर स्वयं... [पूरी पोस्ट]
writer शिरीष कुमार मौर्य

युवा कविता

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[31 May 2010 10:00 AM]

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