पशु

मनोज -- सत्येन्द्र झा किसी साहित्यिक दिवस पर लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। लेख का विषय था 'पशु की उपयोगिता'। पुरस्कृत लेखक ने लिखा था, "पशु की उपयोगिता मनुष्य से अधिक होती है, क्यूंकि प्रत्येक मनुष्य के अन्दर एक पशु रहता है। जब यह पशु बाहर आ कर मनुष्य... [पूरी पोस्ट]
writer करण समस्तीपुरी

सत्येन्द्र झा

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[31 May 2010 09:00 AM]

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