मैं और वो
सदियों से सोया ; “मैं” अन्धकार में। कोई आयेगा;मुझे जगायेगा,जैसे ;इसी इंतजार में। “वो” ,आया ;एक बार नहीं , बार-बार आया ;मुझे जगाया,झिंझोड़ा;और, "दिया",जलाया । पर, हाय रे ; “मेरा” "आलस्य","अवचेतना", और;उससे भी बढ़कर,"अहंकार" । “मैं”,“उसे”, नहीं जान पाया ।...
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शंकर फुलारा
मैं(समाज)
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[31 May 2010 08:36 AM]



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