तुम कहाँ हो
एक बादल आकर रुका हैकुछ नम सी हवाओं ने छुआ हैतुम कहाँ होबूंदें बरसने को हैं मन सोंधा हो उठा है चेहरे के इन्द्रधनुषी रंगआँखों से टपकने लगे हैंकोई देख ले उससे पहले आ जाओफिर जमके बारिश होहवाएँ चलेंबिजली चमके बादल गरजे तुम्हारे साथ मैं धुली धुली पत्तियों सी...
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रश्मि प्रभा...
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[31 May 2010 08:26 AM]



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