ख्वाबों का हकीकत हो जाना अपशकुन है।

Ajnabi मुझे किसी ने चाँद कहकर पुकारा था।अब बरसों हो गये है...बरसों से... हर रोज सवाल रहता है,मैं आज को कैसे जिऊं?मुझे नहीं पता,इतना दिनों तक कौन जिन्दा रहा है, मुझ में, मेरे सिवा।मेरी पुरानी होती आंखों मेंख्वाब वही बरसों पुराने और तरो ताजा हैंबिना हकीकत में... [पूरी पोस्ट]
writer Rajey Sha

कवि‍ता Kavita

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[31 May 2010 07:50 AM]

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