मेरी खिचडी और अटलबिहारी बाजपेयी जी के गुलाबजामुन

Alag sa ललित जी तो निकल लिए चुपचाप दिल्ली क लिए । अपन रह गये वहीं के वहीं वह भी महज एक जिद के कारण। अच्छी भली 6x2 की चलायमान सरकारी जगह भी आरक्षित थी, दिन भी निश्चित था, कार्यक्रम भी बना पड़ा था बस जबान धोखा दे गयी। खुद तो कह कर भीतर घुस गयी मुसीबत झेलनी पड़ी सारे... [पूरी पोस्ट]
writer Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[31 May 2010 08:06 AM]

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