रूसवाई

दर्पण रूसवाईबड़े बेरहम होते हैं रूसवाई के रास्ते,वो खोज रहा है अपनी रिहाई के रास्तेएक जोश  था अजीब जुनूँ था उसे परवाज़ का,न जुर्रत कर सका देखे तमाशाई के रास्तेएक मज़बूत क़फ़स में सिमट गया है जिस्म उसका,जौफ में ढून्ढता है वो तवानाई... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI
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[31 May 2010 07:57 AM]

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