शराबी की ज़िन्दगी
जो पूछ बैठे हम एक शराबी से शराबखाने का पता,बोला वह की आप भी देखने से लगते हैं लापता,इस बात पे हमने भी बोल दिया,अरे ओ पियक्कड़-ऐ-आज़महमें तो है बस एक रात का गम, पर तुम ज़रा पिया करो थोडा कम,हिचकिचाते जिया करते हो,कश-म-कश में पड़े रहते हो,अब तो नाम भूल जाना...
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पियूष अग्रवाल
कविता
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[31 May 2010 07:32 AM]



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