हमने माना कि रिश्ते पुराने हुए,कुछ हमारे भी बारे में सोचा करो.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़ज़लहमने माना कि रिश्ते पुराने हुए, कुछ हमारे भी बारे में सोचा करो.वास्ता तुम भले ना रखो हमसे अब, यूँ सरेआम हमको न रुस्वा करो.ऐब लाखों हैं हममें कहा आपने, कुछ हुनर पर हमारे भी बोला करो.कोस लो कोस लो हम को जी भर के तुम, कनखियों से मगर यूँ न देखा करो.हाल... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[31 May 2010 06:41 AM]

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