मनुष्यों के गिरने के कोई नियम नहीं होते

कबाड़खाना कल आपने नरेश सक्सेना जी की एक कविता पढ़ी थी. नरेश जी के यहां विज्ञान की मूल धारणाएं अद्भुत काव्य-आयाम ग्रहण कर लेती हैं और साधारण से साधारण लगने वाली चीज़ें और प्रक्रियाएं एकबारगी किसी नए अर्थ के साथ हमारे सामने उद्घाटित होती हैं. आज इसी क्रम में पढ़िये... [पूरी पोस्ट]
writer Ashok Pande
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[31 May 2010 01:36 AM]

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