"आम रसीले भोले-भाले!!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
पकने को तैयार खड़े हैं! शाखाओं पर लदे पड़े हैं!!झूमर बनकर लटक रहे हैं! झूम-झूम कर मटक रहे हैं!! कोई दशहरी कोई लँगड़ा! फजरी कितना मोटा तगड़ा!! बम्बइया की शान निराली! तोतापरी बहुत मतवाली!! कुछ गुलाब की खुशबू वाले! आम रसीले भोले-भाले!!...
[पूरी पोस्ट]
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
25
3
0
3
22
[31 May 2010 00:49 AM]



Shuffle








