चरगोड़िया
भूख नई देखय जूठा भात,प्यार (मया) नई देखय जात-कुजात॥समय-समय के बात, समय हर देही वोला परही लेनाकभू दोहनी भर घी मिलही, कभू नई मिलही चना-फुटेना।राजा अउ भिखारी सबला, इही समय हर नाच नचाथे,राजमहल के रानी तक ला, थोपे बर पर जाही छेना॥बेटी के बर बिहाव, टीका...
[पूरी पोस्ट]
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
रघुबीर अग्रवाल 'पथिक'
9
0
0
0
0
[30 May 2010 23:00 PM]



Shuffle








