ब्लॉग जगत की लीला है अनुपम अपरम्पार
ब्लॉग जगत की लीला है अनुपम अपरम्पारक्यों हम दांव पेंच में पड़ रहे,बस, अब नहीं पड़ेंगे,लिखते रहेंगे, उमड़ते घुमड़ते विचारक्योंकि.......शब्द सँवारे बोलिए शब्द के हाथ न पाँवएक शब्द औषधि करे एक शब्द करे घावसुप्रभात व जय जोहार............
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सूर्यकान्त गुप्ता
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[30 May 2010 22:43 PM]



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