वक़्त की गर्द से परे
"वक़्त की गर्द से परे"वक़्त की गर्द से परेएक पल तुमको सुन लेतीतारो की आगोश में छिप परअक्स तुम्हारा मन में धर लेती प्रेम ठिठोली चंदा की अठखेली संग तुम्हारे अंक में भर लेती..एक पल तुमको सुन लेती..... नदिया की धारा जुगनु तारा प्रीत से बोझिल आलम साराशीत पवन...
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seema gupta
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[30 May 2010 22:06 PM]



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