कमीज

prayaas उड़ने लगा है रंग,दिखने लगे हैं रेशे,और रंगत खोने लगी है/मेरी यह कमीजअब पुरानी होने लगी है/वह दूसरी  जो मेरे मिजाज सेकम मेल खाती थी/इसलिए यदा कदा हीमेरे साथ बाहर जाती थी/अब मेरे मन को भाने लगी है/इस कमीज से... [पूरी पोस्ट]
writer pawan dhiman
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[30 May 2010 21:18 PM]

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