हे प्रभु!! ये कैसी दुनिया तेरी!
कमर का दर्द, वैसे तो अब काहे की कमर, कमरा ही कहो, हाय!! बैठने नहीं देता और ये छपास पीड़ा, लिखूँ और छापूँ, लेटने नहीं देती. कैसी मोह माया है ये प्रभु!! मैं गरीब इन दो दर्दों की द्वन्द के बीच जूझता अधलेटा सा - दोनों के साथ थोड़ा थोड़ा न्याय और थोड़ा थोड़ा...
[पूरी पोस्ट]
Udan Tashtari
व्यंग्य
132
11
3
8
25
[30 May 2010 21:00 PM]



Shuffle








