उम्मीद
चिथडों में किसी तरह अपना तन छुपाये 11 वर्षीय राजू सेठ दीनदयाल के यहाँ जूठे बर्तन साफ कर रहा था.वह दो वर्षों से दीनदयाल जी के यहाँ काम कर रहा था.दीपावली नजदीक आ रही थी और उसके पास बेहतर कपडे नहीं थे. सहसा उसे सेठ जी के बेटे निसर्ग की आवाज सुनायी दी,जो...
[पूरी पोस्ट]
बालमुकुन्द अग्रवाल,पेंड्रा
12
1
0
1
6
[30 May 2010 20:25 PM]



Shuffle








