जिंदगी फ़िराक़ की नज़र से

गूंजअनुगूंज / GUNJANUGUNJ मौत का भी इलाज हो शायद जिंदगी का कोई इलाज नहीं ***********************न समझने की ये बातें हैं न समझाने की जिंदगी उचटी हुई नींद है दीवाने की ************************** गुर जिंदगी के सीखे खिलती हुई कली से लब पर है मुस्कराहट दिल खून रो रहा है... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Bharti
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[30 May 2010 13:51 PM]

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