अशोक वाजपेयी की एक और प्यारी कविता

जनपद अशोक वाजपेयी की कविता के कई रंग हैं। उनके पास अपनी काव्यभाषा और अपना मुहावरा है। उनमें मूर्तन-अमूर्तन की लुकाछिपी, सूक्ष्म को स्थूल-स्थूल को सूक्ष्म तथा प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष को प्रत्यक्ष बनाकर कविता में उपस्थित करने की असाधारण योग्यता... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[30 May 2010 12:18 PM]

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