राहें
राहेंकभी भूल गए थे, जिन राहों कोकल, मैंने उन पर चल कर देखाप्रेम पसारे, राहें तकते उनको आज वहीँ पर देखामैंने कितनी धारें बदलीं, हर पल अपनी राहें बदलीं नाते-रिश्ते, दुनियादारी,जाने कितनी बाहें बदली पर, आस बिछाए,...
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रचना दीक्षित
कविता
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[30 May 2010 11:47 AM]



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