रीते आँगन का सूनापन
रीते आँगन का सूनापन भर जाता दसों दिशाओं में,विगलित हो जाता है कण-कण !रीते आँगन का सूनापन ! नव पल्लव आच्छादित पीपलरक्तिम तन सिसकी सी भरता,सूने कोटर के पास बया चंचल हो परिक्रमा करता,उसके नन्हे-मुन्नों के स्वरना उसे सुनाई देते हैं,पीपल की नंगी बाहों...
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Sadhana Vaid
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[30 May 2010 09:22 AM]



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