मुक्तिका: थोड़ा ज्यादा....... --संजीव 'सलिल'

KABEERA KHADA BAZAR MEIN मुक्तिकाथोड़ा ज्यादा... संजीव 'सलिल'**थोड़ा ज्यादा, ज्यादा कम.चाहा सुख तो पाया गम.अधरों पर मुस्कान मिलीलेकिन आँखें पायीं नम.दूर करो हाथों से बम.मिलो गले कह बम-बम-बम.'मैं'-'तू' भूलें काश सभीकहें साथ मिल सारे 'हम'.सात जन्म का वादा करठोंक रहे आपस में ख़म.मन... [पूरी पोस्ट]
writer दिव्य नर्मदा divya narmada
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[30 May 2010 06:50 AM]

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