अमन और तरक्की गेंहूं की तरह पिसते हैं-हिन्दी शायरी (aman aur tarakki piste hain-hindi shayari)
खिली हुई हैं उनकी बाछें,बिछ गयी हैं फिर जमीन पर आज कुछ लाशें,क्योंकि कातिलों से उनके जज़्बातों के रिश्ते हैं।अपने ख्यालों का ओर छोर पता नहीं,हमख्याल जहां देखते, कोरस गाने लगते हैं वहीं,अपनी अक्ल किराये पर चलाते हैं,पर आजाद खुद को बताते हैं,खूनखराबे और...
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दीपक भारतदीप
hindi satire poem
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[30 May 2010 07:06 AM]



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