इम्तिहान
एक अजीब सा है भय व्याप्त,एक अनजानी सी है घहबड़ाहाट.किसी को किसी से नही है मतलब,दिल मे है सब के एक अकुलाह्ट.हृदय मे है जो ,वो हो ना जाए विस्मृत,इस विचार से दिल हो रहा है विचलित.मष्तिश्क पर पड रहा है ख़ासा ज़ोर,उसकी क्षमता का हो रहा है पूरा प्रयोग.शनेः...
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Aseem
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[29 May 2010 10:52 AM]



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