आज रात्रि है 'मधुशाला' : बच्चन की मधुशाला से प्रेरित

उलझन.. निद्रा बन जाती है साकी लगी पिलाने स्वाप्नों की हाला,नही रोक पता ये मन भी इन आँखों का मोहक प्याला.प्रतीक्षण पाश मे जकड़ रही है सम्मोहित करती ये मधुबाला,किसी के वश मे ना अब आएगी आज रात्रि है 'मधुशाला'.(बच्चन की मधुशाला से प्रेरित)... [पूरी पोस्ट]
writer Aseem
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[29 May 2010 10:49 AM]

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