फ़ितरत छुपाने को, कोई ,नकाब तो लगाओ यारों......अजय कुमार झा
मुहब्बत कर न सको तो , नफ़रत की ही ,कम से कम ,इंतहा तो दिखाओ यारों ,॥कर देना पैवस्त खंजर ,मेरी पीठ पर ही सही,चलो इसी बहाने इक बार ,गले तो लगाओ यारों ,॥मैं समझ लूंगा तुमको, आईना , या अपने जैसा ,फ़ितरत छुपाने को, कोई ,नकाब तो लगाओ यारों ,॥माना कि चलना मुझे...
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अजय कुमार झा
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[30 May 2010 05:35 AM]



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