मुक्तिका: .....डरे रहे. --संजीव 'सलिल'

लखनऊ ब्लॉगर एसोसिएशन मुक्तिका.....डरे रहे.संजीव 'सलिल'**हम डरे-डरे रहे.तुम डरे-डरे रहे.दूरियों को दूर कर निडर हुए, खरे रहे.हौसलों के वृक्ष पालगन-जल हरे रहे.रिक्त हुए जोड़कर बाँटकर भरे रहे.नष्ट हुए व्यर्थ वे जो महज धरे रहे.निज हितों में लीन जो समझिये मरे रहे.सार्थक हैं वे... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

muktika

views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[30 May 2010 03:47 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix